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Friday, 20 February 2015

१०० रूपए का आधार कार्ड


photo courtesy: Google images


आधार कार्ड क्या है, क्यों है, किसलिए बनाना ज़रूरी है, अब ये बताने की ज़रूरत नहीं है किसी को। पर बनता कैसे है, आज भी ये सवाल है।  १०० रुपये का आधारकार्ड.... मिल रहा है।  हम खुद बनवाए है अपना अभी पिछले हफ्ते। ऐसा मेरे छोटे भाई ने मुझे ये समझाते हुए बताया की क्यों  परेशान हो रही हूँ। बाजार में एक कमरा है छोटा सा चौराहे के कोने में।  वही एक आदमी बैठता है।  १०० रुपये दो और रसीद ले लो। यहाँ मैं एक बात स्पष्ट कर दूँ कि  रसीद आधार कार्ड बन जाने की पुष्टि की एक पावती है कि फला व्यक्ति का कार्ड बन गया। और इसमें आपकी फोटो और सारी  जानकारी छपी प्राप्त होगी। यह पावती आधार कार्ड के मिलने तक उसके स्थान पर प्रयोग में लाया जाता है। और इस प्रिंटआउट में किसी प्रकार के पैसा या चार्जेज लेने का वर्णन नहीं दीखता है।   खैर, छोटा भाई आगे की रेट लिस्ट बताते हुए कहता है, बनने को तो २० में भी बन जायेगा पर वो तीन दिन बाद रसीद देता है।  थोड़ा रिस्की है दीदी।  मनो मेरी बात, चलो कल तुम्हारा आधारकार्ड तुरंत बनवा देता हूँ, वो भी अच्छी फोटो वाला।  तभी एक काका आये. अधेड़ उम्र के है। गाँव में घर से कुछ दूरी पर रहते है।  हमारी बात सुन रहे थे तो छोटे भाई की बेवकूफी भरी बातें सुन गुस्से को रोक न पाये। और हमारे पास आ गये. उसे गुस्से में लताड़ते हुए बोले, पागल वागल हो क्या? तुम लोगो को कुछ पता तो रहता नहीं है।  बस बाप माई का पैसा उड़ाओ। १०० रूपया देकर ये आधार कार्ड बनवाए है, तनिक देख लो इन्हे।  अरे बकलोल, वही गाँव के पीछे एक आदमी पचास में बनाता है। एकदम सही और रसीद भी कुछ घंटा बाद दे देता है।  मज़ाक उड़ाते हुए बोले बताओ बाप नेता है और बेटवा १०० में अधार कार्ड बनवा रहा है।  अरे तुम्हारा तो फ्री में हो जाना चाहिए।  छोटा भाई अपनी बेवकूफी और ५० रूपये के नुक्सान को समझते हुए बुझे मन से बोला, तो क्या करते ? मेरा पहले फ्री ही बना था।  सरकारी लोग जब आये थे।  पर वो आया ही नहीं।  तो दुबारा बनाने की लिया बोला हम को। चौराहे पे बना रहा था तो हम चले गए।  काका खुद की जानकारी पे मूछ ऐंठते चले गए, छोटा भाई ५० रुपये के लिए दुखी हो रहा था और मैं इन लोगो को सुन कर और देख कर shocked थी।
तब तक घर के और लोग आ गए और आस पास वाले भी।  शाम का वक़्त था, बैठक बाजी का समय. और आज टॉपिक पहले ही मिल गया था।  आधार कार्ड वो भी १०० रुपये का। ५० रुपये के नुकसान के साथ।  मैंने चौंक कर कहा भैया ये फ्री में मिलता है। इसका कोई पैसा नही लगता। ये पहचान पत्र है आपका। आपका अधिकार है। सरकार की ड्यूटी है।  इसके पैसा लेना गलत है। मेरा इतना सीधा बोलना वह बैठे सभी बड़े लोगो कई जांनकारी पे प्रश्न करना सा हो गया। बोले हम जानते है। बेवकूफ नहीं है हम सब।  पर क्या करे? कितने सारे लोगो का कार्ड आया ही नहीं। इन सब में तुम बहुत पीछे हो अभी। हर बात पे आँख- भौ सिकुड़ने लगती है। १०० रुपए देना ज़्यादा असान है।  कौन दौड़े रोज़ DM और सरकारी अफसरों के दफ्तर में? सुनते है ये सब? अपना धंधा पानी छोड़ आदमी ये करेगा तो खायेगा क्या ? कार्ड बनाना ही केवल काम नहीं है, बिटिया।  हम मानते है तुम सही कह रही हो। पर इतना सवाल करोगी तो कभी आगे नहीं बढ़ पाओगी।  इन्ही सब में रह जाओगी। पढ़ तो ली तुम पर बहुत पीछे हो भाई अभी तुम।  मैंने आखिर में इतना कहा कि कल जो आधार कार्ड का शिविर लग रहा है उसमे पैसे नहीं लिए जायेंगे। सब मेरी बात मान गए।

इस पूरी बात चीत में क्या सही, क्या गलत का फैसला करने का जिम्मा मैंने नहीं लिया।  पर हाँ, गलती कहाँ है ये जाना ज़रूरी है।  आधार कार्ड बनाने का ठेका लोकल, 18+, computer, और १२वी पढ़े हुए युवको द्वारा कराया जा रहा है।  एक अच्छा तरीका है लोकल skilled labor को utilize करने का। अब ये लोग २० रूपए लेते है जहाँ लोकल नेता थोड़ा ईमान दार है और मैक्सिमम १०० तो है ही मार्किट रेट।  जो सरासर गलत है। ठीक, हम अपना काम धंधा छोड़ कर रोज़ दफतरों के चक्कर नहीं काट सकते। पे क्या हम एक कागज़ पर लिख कर दस्तखत कर  एप्लीकेशन नहीं डाल सकते की इतना सारे लोगो का कार्ड नहीं आया है? फिर से शिविर लगवाया जाये।  या फिर पैसा नहीं दिया जाये।  और अगर हम ऐसा करते है तो सरकार को या अफसरों को बेईमान कैसे कह सकते है हम। जो हमसे पैसे ले रहे है वो हमारे बीच के ही नेवयुवक है,कोई सरकारी मुलाज़िम नहीं।  सरकार awareness  के लिए टेलीविज़न रेडियो न्यूज़ पेपर हर जगह advertisement दे रही है। फिर भी हम इन पहलुओं से अछूते है। क्या अब पहले की तरह नगाड़े पर सुचना दी जाये गाँव के हर चौराहे पे। आज मैं सरकार की नीतियों और उन के execution and implementation की कमियों से नहीं बल्कि हमारे आप में  भ्रष्टाचार के प्रति आ रही असंवेदनशीलता से दुखी हूँ।  भ्रष्टाचार हमारा culture बनता जा रहा है।

अगर इसे पीछे होना कहते है तो आपकी परिभाषा के हिसाब से मैं पीछे हूँ। पर मैं सवाल करुँगी और उसका जवाब भी खोज निकालूंगी।  जो बीमारी नयी जनरेशन को लग रही है इसके बाद सरकार से पहले खुद में संशोधन करने की ज़रूरत है। आज १०० रपये का पहचान पत्र मिल रहा है, १०,००० म डिग्र्री और २ लाख में  D लेवल की नौकरी।  ये तो है  corruption सबसे निचले स्तर पर। और उपर तो हर काम करने का अलग से खर्च लगता है।, जिसे इज़्ज़त से "service tax" कहते है सरकारी बाबू लोग। और जो इससे ऐतराज़  करे उसे सनकी  और बेवकूफ कहते है।  दिल्ली में जनतंत्र के नए उदहारण से और इस जनादेश से कम  से कम तर्क वितर्क में तो ये "सनकी" लोग औरों को चुप करने लगे है।  आगे देखिये क्या क्या होता है इन MAKE IN INDIA कल्चर में।आसार तो अच्छे नहीं है, ये कह कर कुछ नहीं होगा।  आसार बनाने होंगे। तो कछु  करियेगा भी या बस चाय पीते पीते सरकार को गरियेगा ही। politically incorrect language ज़्यादा appeal करती है आज कल लोगो को।






Wednesday, 11 February 2015

dilli voters to Tsunami hi le aaye....sab beh gye is bahaav me. Main is beech jab delhi me thi to aaye din auto wale, rikshaw wale, sabji, fal wale bhaiya logon se(didi log mili nhi) se unk vote ke baare me baat karti thi. is class ka pura rujhan jhadoo ke liye tha par BJP ki middle class me pakad aur Modi sarkar ki economic aur foreign policy ka asar is election me ek deciding factor lag rha tha. par chaliye ji, accha hi hai...janadesh ka samman karna chahiye. pichli saal isi samay se shuru hua silsila fr se ek naye aayam se shuru ho raha hai...AAP k sath ab puri picture dekhne ka tym is Valentine se shuru kr rhe hai Kejriwal... chaliye dil walon ke shahar ko pyaar k din apni daastan likhne chale apne bandhuon ko badhai aur best wishes. democracy ka ek example kahiye ya janta ki beawaaz lathi, jisme zor bahot hai...ya buzurgo ka buzurg parties ko shraap...ye batane ka kaam pahle se hi media kr rhi hai. Hum aap din bhar unki khabron aur khabron me aa rhe unk vicharon se apne vichar banate rahe hai.. aur isi baat ka dar is baar bhi tha is election me. par kya hua jo dilli ki janta har khabar ko peeche chhodte AAP ke ummeed se bhi zyada unko de gyi ek aitihasik jeet. yeh bhi tay hai ki dilli ne is baar vote apna gussa ya apesha dikhane ka liye nahi kiya hai balki 67% dilli wasiyon ne rajneetik satta ek kisi ko hata kar kisi ki aur ko saupane ke uddeshya se kiya. Yogendra yadav ji ne bataya ek channel ko ki ek do baar south aur sikkim me aisi jeet hui hai...par aaj k sameekaran me dilli me ye jeet na sirf aitihasik hai balki chaukane wali bhi hai. par ek taraf jahan votes ke counting k result bahot jhatke wale hai wahi BJP ki pichli kai jeeton pe sawal nahi khade kar pa rhi hai. ye chinta to hai par iske baad BJP apni ran niti hi badle iski naubat nahi aayi shayad. aisa 84 me bhi hau tha jb BJP ko kewal do saansad mile the..aur tab ke neta Atal ji, Advani ji ne puri strategy hi badal dali thi...aur use criticise bhi kiya gaya tha. par aaj BJP jis stithi me hai...pichle kai chinav result ko dekhte hue..usse us ran niti ki safalta ka andaaja lag jata hai. dilli ki rajneeti alag hai...dusre states se alag. jahan jaat paat..dharm..k naam pr voters polarize nahi kiya ja sakta.

ye jeet jahn BJP ke liye jhatka..Congress ke liye basant ki chutti..aur dusri party ke liye leave without payment hai. wahi AAP ke liye pareeksha ki ghanti. kai saare vaade, dusro se alag hone ka raag suna ke AAP ne apna mauka fr se pa liya aur usk liye unhe badhayi par ab ise wo kaise pura krte hai ise na sirf virodhi dekhna chahenge balki aam aadmi iska inspection tabiyat se karega. kyu ki ye Aam Aadmi(ki) Party hai jahan filhaal abhi tak sabki pahuch hai.
 Ek baat aur...Kejriwal ko Dilli ka naya CM khne k phle is baat pe gaur farmaya jaye ki Kejriwal to jaise49 din ki shadi k baad jahgda kr wapas chali gayi biwi ko mana laye ho...aur is baar to wo bhar k dahej bhi layi hai. jiski ummeed dulhe ko na thi. bas beech me kai logo ne haath pair mara pr dulhan bhi wafadaar nikli. ye baat electronic media me baithe programing heads ko click nhi hui shayad,otherwise ispe adhe ek ghante ka program to ban hi jata. shayad bana ho,mujhse miss ho gya ho. aaj kal waisw bhi log news channels me movie banane ki aadhi training le lete hai news bana kar. khair, media ki creativity se door chalte hai air apne mudde pe aate hai. Dilli ki 67%janta k janadesh ki izzat karte hue Main puri ummeed karti hun ki dilli ke hone wale  CM apne banaye hue rooprekha pr chalenge aur dilli ko naya rukh dene me safal rahenge.
 Nayi aur mazedar baat ye hai ki AAP "naya" krne ki shuruat kr chuki hai...wo 3 MLAs k sath BJP ko opposition me dekhna chahti hai. ab Lok Sabha aur Rajdhani ki Vidhan sabha ke charcha se kuch ho na ho...chai ki bikri badhne k sath sath Lok Sabha ki rating aur channels se competition krne ki stithi me to zarur aa jayegi.

Saturday, 7 February 2015

technically, AAP bhi videos aur slogans k mamle me humare desh ki buddhajiwi aur buzurg catagory me aa rhi parties se peeche nahi hai. waise to humara vote political party se narajagi jatane ka ek tareeka hai aur kisi naye se umeed janate ka aujaar. pahle se ye ki aap ummeed pe khare nahi utare to rejection aur naye ya dusre se ki aap se ummeedein hai humare bhale ki. to chaliye aapko hi mauka de kr dekhte hai.

AAP ne bhi apni party ka acronym soch ke rakha hai...itni der me hi maine na jane kitni baar 'aap' ka jikr kar diya. main Kejriwal ko jeetate dwkhna chahti hun dilli me. Kejriwal kyu? Kejriwal diili ko "Modi" lahje me ummeed dene me safal hue hai..dilli ko lagta hai ki wo aur sabse kuch alag karenge. ye bharosa ki wo alag kar sakte hai se karenge me tabdeel kiya unke 49 days ke karyakaal ne. jiske baare me unhone aadhi janta ko pahade jaisa rata diya hai baar baar bol ke. Hai kuch jo hum chahte hai aur dilli ko de sakte hai. Is baare me main kuch nahi bolungi. Media ke through aap sab tak ye baatein 24*7 pahuchti rahti hai, is bahas ke bahar ki wo kitni factually correct hoti hai aur kitni banayi jati hai apne vested interest me. 
Par main jab bhi Ravish kumar ka Blog( Nai sadak..main follow karti hun)ya Prime Time(NDTV) padhti aur dekhti hun to mere aur dilli k tammam logon ke is sir udhate vishwaas ko ek zor ka jhapad padta hai. ek vishwaas jaga hai shayad kuch accha ho, shayad kuch behtar ho. yr bharosa AAPke 49/days ke trailor se jaga hai..ab hum puri picture dekhna chahte hai.

Aapne silsila shuru kr diya hai ab dekhte hai anjaam-e-ulfat kya hoga.

policeghar

Aisa mera ghar hai
koi na hasta aata
jb bhi aaye koi sandesa
dukh khabar hi sunata

kabhi kahi kuch chuta unka
kabhi loot koi jaata
kabhi lootati kamai uski
kabhi ijjat paani ganwata
har koi rote rote aata
khota muh hi lata

aisa mera ghar hai
koi na hasta aata

na sansadiya bhasha
na vyavhaar
har kisi ki majboori
chahe katil ya munsafdaar

shakti hai milti bharmaar
nibhaye hum bhi sare daromdar
kathin parishram kiya bahot
fir bhi pat hua siyaar
waise to koi bulaye na
to kar lete nashta udhaar
aise ghar me bhi
hum haste barambaar

aise mera ghar hai
koi na aata dene hasi udhaar
takleefo me sathi unke
tyoharo me rakhwale hum
khushiyon me nazar ka teeka
kismat ke kamwale hum
kuch kamjoori humari hai
raahi ki majbiori nyaari hai
har baat ka kuch tod hai
paisa lena ab shayaf jod hai


kahte ab ghar wale
kisko le kisko de
sab majboori wale hai
de ke hum bhi aaye hai
ab hum hi lene wale hai


ghar mera hasta hai
in gunaaho k beech me
saikadon me hum do rakshak hai
in ghar walo ke beech me
aise me ghar ki takat samjho
tum bhi apna kartab samjho
hum danda nhi uthayeng
bin baat barish ki aafat samjho


aisa mera ghar hai
aisa mera ghar hai

Friday, 6 February 2015

ranjishe hi sahi dil dukhane ke liye aa....
courtesy: Youtube





Wednesday, 4 February 2015

तमन्ना की "दो मिलीमीटर वाली हसी" और उस्ताद का "दस ग्राम प्यार" बड़ा यूनीक  है यार।  तमन्ना का वो "छोटा प्रेम" और उस्ताद का "जमूरे" से प्यार बड़ा यूनिक है यार। तमन्ना का कमरे में पड़े बिस्तर के कोने में बैठ खिलखिला के हसना और उस्ताद का हर पल में हसी खोज लेना यूनिक है यार। तमन्ना "मेरी पगली" और उस्ताद की "मैं पगली"
.… ये बड़ा यूनिक है यार। 

Sunday, 1 February 2015

फिर से आया वो 'जिन्न'...

थी  कुछ उलझी
कुछ सुलझी सी 
मिलता न जवाब कुछ पूछ के 
चलने लगी थी 
यूं ही सब कुछ मान के 
करने लगी थी पूरे अपने कुछ वादे 
कुछ अनकहे 
कुछ समझे से 
फिर आ गया 'जिन्न'
मुझे तोड़ने 
बहरूपिया निकला वो 
पहले प्यार से 
फिर दुलार के 
खिला दी वो हसी 
जो गयी थी उसके जाने से 
इस डर के साथ 
कि वो है तो एक जिन्न 
अपना वादा निभाने आया है 
कौन किसे रौंदता है इस बार
ये देखने और दिखाने आया है।  

था वो मेरा जिंन्न 
मेरे टूटने से दर्द था उसे 
पर वो इस बार जीतने आया था 
मुझे हरा कर खुद हारने आया था 
क्या हुआ नही पता 
इस बार वो बिखरा सा था कुछ 
पिछली मुलाकात के साथ के कुछ निशान थे 
वो दर्द थे उसके शायद 
उसी का हिसाब चुकाने आया था 
था वो  मेरा जिन्न 
मुझे हराने और मुझसे हारने आया था 

इस बार मैं और उलझी 
अपने सुलझे अंदाज़ में 
और वो छोड़ गया 
फिर से मुझे उसके इंतज़ार में। 

यह  मेरे एक पुराने ब्लॉग से जुड़ा एक तार है ,,,,इसकी पकड़ इस लिंक से जुडी है http://kahnachahtihu.blogspot.in/2013/11/blog-post_23.html

धन्यवाद