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Saturday, 25 July 2015

Blood and Shed

A piece of work for you from my tiny world... written in 2013.  it is short but not sweet...i guess.

This one is dedicated to my friends who complaint of their hardship in reading HINDI.  i hope you will like it..!!

Satire of Mast
desire of  Past( discussion)
mourning for devastation
Mayhem the day long!

Reticence about thoughts
presence of mask
could not believe
Mayhem the day long!

all was covered, some to show
conformity, integrity, adaptation on low
still willing for life, aah! mayhem
mayhem the day long!

bloodshed in dark,
cries a lot, unable to forget
fear of mayhem...that will be there
...life long..life  long!

Mayhem- chaos
Reticence- reserve, shyness / अल्पभाषिता
conformity- conventionality/ अनुपालन

Friday, 3 July 2015

एक गोले के दो रंग, दो नाम, दो काम

एक छोटी बच्ची माँ के साथ उसका हाथ पकडे रात में बाहर खुले में घूम रही थी। उसकी नज़र आसमान में चमकते चाँद पे गयी जो अपनी रौशनी से रात की स्याह चादर उजली कर रहा था। वो माँ के आगे पीछे छुपते चाँद से छुपम छुपाई खेल रही थी। अगली सुबह 5 बजे छत पे दिन की रोशनी आने से नींद खुलने पे उसे उस चाँद की जगह एक नारंगी रंग का गोला दिखा।उतना ही गोल बीस रंग का फरक। 
उस छोटी सी बच्ची के सवाल और जवाब..

रात के दस बजे
आसमान में एक चमकता 
चांदी रंग का गोल गोल सुन्दर सा
घूम रहा था मेरे संग
जैसे जैसे मैं घुमू 
झांके मुझे कभी 
पेड़ के पीछे से
तो कभी छत की रेलिंग में बने खानो से 
शांत था 
पर सुबह भोर में
5 बजे
था आसमान में 
एक नारंगी गोला जैसे गुस्से में लाल
मैं जाऊ जहाँ जहाँ
वही आये पीछे पीछे
दिन चढ़ते वो गुस्साए
लाल और होता जाये

क्या हुआ उसे
रात में तो शांत था
किसी का इंतजार था क्या उसको
जो उससे मिलने न आया
या फिर ये बहरूपिया रंग बदलता है
दिन होने पे लाल रंग
और साँझ में चाँद ये बनता है।

आज न पीछा छोड़े है
मैं निकली क्या बाहर
ये मुझे ही घूरे है
हवा से लड़ जाता है
वो गुस्से में झल्ला 
हमे जलाती है
इसके गुस्से से धरती भी
आग बन जाती है।

उससे बोलो बरसने को
शायद ये ठंठा पड़ जाये
पता नही क्या ज़िद है इसको
शायद होश में आ जाये
इसका कुछ छूटा है क्या
जो धरती घूरे जाता है
बोलो इसको ये मेरी है
आसमान पे हक़ क्यों न जताता है।

बादल इसका पापा है
तभी तो उसके आने पे छिप जाता है।
न हो गुस्सा 
माँ बोली तू 'सूरज' है
तो मेरे 'भैया' जैसा 
मुझपे क्यों गुर्राता है।

धरती मेरी माँ है
इसके आँचल में छुप जाउंगी
तेरे हाथ न आउंगी।
गर्मी छुट्टी है
तेरे पापा घर आये है
अब देख तू 
बादल देख आ गया
अब तेरी शामत आई है (हसते हुए) ।
लगा  शिकायत डटवाउंगी
पापा से पिटवाउंगी
नहीं मिलेगा धरती से कुछ
तुझे तेरे पपा से डटवाऊंगी।